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JAYANTA TOPADAR

Abstract Tragedy Inspirational

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JAYANTA TOPADAR

Abstract Tragedy Inspirational

कंटकमय ताज...

कंटकमय ताज...

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हर एक शख्स

मजबूर है

इस जीवन-राज में

अपने सर पर

बोझ लिए

कंटकमय ताज की...!


न चाहते हुए भी

आनन-फानन

बेतहाशा दौड़-भाग करता

हर एक शख्स

मजबूर है

इस जीवन-राज में

अपने सर पर

बोझ लिए

कंटकमय ताज की...!


हर एक शख्स

क़ाबिल है

अपने तरीके से

बेशक़ कुछ कर गुज़रने को,

मगर आढ़े आकर

कई अनसुलझे सवाल

उसे अपनी सोच की

सीमा

बदलने को

मजबूर कर देता है।


हर संभव कोशिश

करते-करते

एक दिन कोई शख्स

कहीं अगर

गलती से भी

अपनी क़ाबिलीयत

को टटोलने की

कोशिश करता है,

तो उसके हाथ

कोरा कागज़ ही लगता है,

क्योंकि उसे ये मालूम

पड़ ही चुका होता है कि

किसी को

ताज कहीं नसीब

होता भी है, तो

वो पूर्णतया

कंटकमय रूप में ही

प्रकट होता है !



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