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ritesh deo

Romance

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ritesh deo

Romance

कल्पना

कल्पना

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दिल और दिमाग में कोई जगह नहीं थी

हर जगह सिर्फ वही बसी थी

मुश्किल था जीना उसके बिना

हर क्षण ,हर पल ,हर दिन

मैं, मैं में नहीं रहता किसी दिन

पर आज नहीं होता है उनसे मिलना

शायद उनकी यादों में भी नहीं है कोई जगह

मालूम नहीं क्या है वजह

समय ने दिया है कैसा सिला

लेकिन नहीं है कोई शिकवा और गिला

जब तक था साथ स्नेह तो है मिला

था मैं ही उसका एक मित्र

भूली नहीं होगी मेरी चित्र

क्योंकि हो सकता है कोई हो मजबूरी

नहीं है मेरा फिर भी दिल से कोई दूरी

स्नेह था मेरा निःस्वार्थ

सच्चे स्नेह में होता है क्या कोई स्वार्थ।


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