Pawanesh Thakurathi
Tragedy
अपनों की उपेक्षा सहती
चुप्पी से बहुत कुछ कहती
अंधियारे के आंगन में
धूप की चाहत मन में
सार्थक जीवन की कशमकश
अग्निपरीक्षा को विवश
न जाने कितनी पतिव्रताएं
न जाने कितनी सीताएं।
दिसंबर के मही...
गणतंत्र
तिरंगा
चोर
जीवन लाखों का...
प्यारी हिंदी ...
पत्रकार, तुम ...
डर
समस्या
हल को हुआ बंज...
मसलों का कुछ हल होना चाहिए तुम मसाला भरो मसलों में तो फिर क्या करें। मसलों का कुछ हल होना चाहिए तुम मसाला भरो मसलों में तो फिर क्या करें।
जनता हैं, मुर्गा नहीं हैं उठा कर मत फेंको मुर्दा नहीं हैं। जनता हैं, मुर्गा नहीं हैं उठा कर मत फेंको मुर्दा नहीं हैं।
सोचा था हमने भी करते होंगे प्यार हमें, पर कैसा प्यार यह। सोचा था हमने भी करते होंगे प्यार हमें, पर कैसा प्यार यह।
जब जब सजती है तुम्हारी महफिलें हमारी जी भर के रुसवाई होती है। जब जब सजती है तुम्हारी महफिलें हमारी जी भर के रुसवाई होती है।
बेशर्म भ्रष्टाचारी चाणक्य का सारा कस बल निकल जाता, भ्रष्ट नेताओं की लिस्ट में एक नाम औ बेशर्म भ्रष्टाचारी चाणक्य का सारा कस बल निकल जाता, भ्रष्ट नेताओं की लिस्ट में...
चना कैसे कर सकता है मना उसे तो हर हाल में भाड़ में ही जाना है। चना कैसे कर सकता है मना उसे तो हर हाल में भाड़ में ही जाना है।
परिचय के नाम पर क्यों हिस्सों में विभाजित कर सीमा में बाँध दिया जाता है आदमी। परिचय के नाम पर क्यों हिस्सों में विभाजित कर सीमा में बाँध दिया जाता है आदमी...
वो एलियन था या हम एलियन थे यह परिभाषा ही ब्यर्थ हुई। वो एलियन था या हम एलियन थे यह परिभाषा ही ब्यर्थ हुई।
वह गुमनाम, बेनाम अस्तित्व किसी गुमनाम शहर, गांव, बस्ती में ! वह गुमनाम, बेनाम अस्तित्व किसी गुमनाम शहर, गांव, बस्ती में !
कहूँ कैसे न कोई आप सा आया कभी, कहूँ कैसे न कोई आप सा आया कभी,
हम न रहे, बन्दरों की तरह नकल करते रहे। अपनी बोली भूलकर। हम न रहे, बन्दरों की तरह नकल करते रहे। अपनी बोली भूलकर।
खंडहरों की चाहते नहीं हसरतें होती हैं। खंडहरों की चाहते नहीं हसरतें होती हैं।
चाह कर भी औरों की पीर हर न सकूं पोंछ सकूं आंसू-न अपनों के न गैरों के। चाह कर भी औरों की पीर हर न सकूं पोंछ सकूं आंसू-न अपनों के न गैरों के।
ऊँच नीच, अमीर गरीब में भेद ही भेद हैं ये भरम आज टूटे हुए हैं। ऊँच नीच, अमीर गरीब में भेद ही भेद हैं ये भरम आज टूटे हुए हैं।
बचपन मे देखा था गौरेया एक चिड़िया थी प्यारी। बचपन मे देखा था गौरेया एक चिड़िया थी प्यारी।
यह इश्क है ज़नाब यह मुक्कमल हो जाये तो इश्क कहाँ रह जाता है। यह इश्क है ज़नाब यह मुक्कमल हो जाये तो इश्क कहाँ रह जाता है।
कुछ टूटे फूटे से थोड़े अक्षर निर्मित शब्द तुम्हारे पास भेज रही हूँ। कुछ टूटे फूटे से थोड़े अक्षर निर्मित शब्द तुम्हारे पास भेज रही हूँ।
कट रही रातें गिनकर तारे तेरे बिन। अगोरता रहता आँगन मै तेरे बिन। कट रही रातें गिनकर तारे तेरे बिन। अगोरता रहता आँगन मै तेरे बिन।
खिड़की भी बंद करनी पड़ी और सोने का उपक्रम करने लगे न चाहते हुए भी। खिड़की भी बंद करनी पड़ी और सोने का उपक्रम करने लगे न चाहते हुए भी।
वेतन के लिए, जद्दोजहद करता रहता है। वेतन के लिए, जद्दोजहद करता रहता है।