STORYMIRROR

B. sadhana

Tragedy Fantasy Inspirational

4  

B. sadhana

Tragedy Fantasy Inspirational

किसे पता था।

किसे पता था।

1 min
226

जिंदगी का खेल बड़ा अनोखा,

आए दिन दिखाएं तमाशे अनेक।।

किस पल किसका आखिरी पल हो

जान ना पाया कोई, ना कोई।।


कोई इस विधि के खेल को 

समझ ना पाया, ना डल पाया।।

जिंदगी का समुन्दर कब बूंद में बदला

कोई अंदाज़ा लगा ना पाया।।


पल में हर पल सिमट गया,

देखते देखते वो आखिरी पल आ गया।।

कहने अलविदा दुःख बरी इस जिंदगी को

उन बुलंद ऊंचाइयों को गले लगाते चल पड़े।


उस अंजान राह पर ,जहां ना कोई अपना है

ना कोई पराया है, अपनो से दूर

गैरों के करीब ,उस राह पर चल पड़े,

शायद अब कहीं तो सुकून मिले।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy