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Jai Singh(Jai)

Tragedy

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Jai Singh(Jai)

Tragedy

"किसान "

"किसान "

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समझौता के फैर में, कृषि नियम बने फांस।

हक में जल्द फैसला , किसान करते आस।

किसान करते आस, मंडी में भाव लगायै।

कड़ाके की ठंड में, मिलकर रोष जतावै।

कहै 'जय' अन्नदाता,की मांग बनी अब न्यौता।

रब शीर्घ मिले न्याय, होवै सुखद समझौता।


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