STORYMIRROR

राही अंजाना

Abstract

3  

राही अंजाना

Abstract

कीमत जानते नहीं

कीमत जानते नहीं

1 min
368

कीमत कितनी है गिनती कितनी जानते नहीं,

मांगते हैं उनसे जो चेहरा कोई पहचानते नहीं, 


उम्र के पहले पड़ाव पर ही सीख लेते हैं वो सब, 

जो फैलाते हैं बस हाथ सम्बन्ध कोई मानते नहीं,


बटोर लेते हैं मिलता है जो भी जैसा भी कहीं से,

बोलते हैं साफ़ जो कभी भी पानी छानते नहीं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract