ख़्वाहिश
ख़्वाहिश
इफ़्तिख़ार साहब के दो बच्चे हैं बड़ा बेटा रईस और बेटी फौज़िया की शादी बचपन में बड़े ताया के बेटे से तय कर दी थी ,उनके बुज़ुर्गों ने इफ़्तिख़ार बहुत बड़े वकील थे , फौज़िया, रईस और ताया के बच्चे सब एक ही फेमिली में बड़े हुए थे। जिधर भी पहुंच जाता सबको ख़ुश कर जाता ख़ानदान वालों का बड़ा चहेता था।
इफ़्तिख़ार साहब और राबिया फौज़िया की शादी के सिलसिले में बडे़ भाई से ज़िक्र करने जाते हैं कि "आपका क्या ख़्याल हैं अब फौज़िया और रियाज़ की शादी कर दी जाए।" इफ़्तिख़ार से भाई कहते हैं"रियाज़ सेकंड लेफ्टीनेंट पूना में पोस्टेड हुआ है देखतें छुट्टी कब मिल पाएगी।"इफ़्तिख़ार के भाई कहतें है "तुम्हारी भाभी से सलाह- मशवर करके हम आतें हैं इंशाअल्लाह तारीख़ तय करतें हैं।"
फौज़िया बचपन से ज़हीन है ,उसने अपनी एजुकेशन पूरी कर सरकारी सर्विस के लिए काम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी कर रही है। राबिया फौज़िया को हमेशा यही सिखाती है औरत को अपने केरियर को एहमियत देना चाहिए, फौज़िया अपने अब्बू को कहती है "अभी शादी के लिए जल्दी न करें आप मैं,अपना केरियर बना लूं कुछ अचीव कर लूँ तब ही शादी करना चाहती हूँ।"
इफ़्तिख़ार साहब कहते हैं "अरे बेटी तुम्हारे ताया अब्बू मिलिट्री में है और रियाज़ भी माशाअल्लाह से मिलिट्री में सेकंड लेफ्टीनेंट की पोस्ट पर है पूना में फिर तुम जाब्स के चक्कर में क्यों पड़ना चाहती हो?"
"अब्बू मुझे भी कुछ बनना है मेरी पढ़ाई यूँ ही नहीं ज़ाया होने दूंगी।"
अब्बू कहते है "देखो राबिया हमारी बेटी तो बहुत एम्बिशियश है", राबिया भी मुस्कुरा कर कहती हैं "हां सही तो है,औरत की अपनी पहचान होना चाहिए मैं भी फौज़िया की बात सही मानती हूँ।"
