Aapki Kavyatri
Abstract
तुम्हारी खुशी तब तक
जायज नहीं मानी जायेगी
जब तक तुम खुद की
खुशी में खुश नहीं होंगे।
मां
स्त्री
चाय
वाह
परी
Maa
दूरियां
साथ
समझता
बेटी
वार कर सारा सुकूँ, तुझ पर अपना ये रूह तो आज भी तड़पती है। वार कर सारा सुकूँ, तुझ पर अपना ये रूह तो आज भी तड़पती है।
यूँ लगा मुझको कोई मुझसा मिला भीड़ में जब भी कोई तनहा मिला। यूँ लगा मुझको कोई मुझसा मिला भीड़ में जब भी कोई तनहा मिला।
यूं भूले बिसरे याद करके इस मौके पर पहले मोहब्बत की तरह हो जाना। यूं भूले बिसरे याद करके इस मौके पर पहले मोहब्बत की तरह हो जाना।
रंगों की दुनियां के खेल निराले, कभी ताज़े तो कभी पुराने। रंगों की दुनियां के खेल निराले, कभी ताज़े तो कभी पुराने।
जिस भगवान का हम धन्यवाद तक नहीं करते कष्ट में उसी को याद भी करते हैं, जिस भगवान का हम धन्यवाद तक नहीं करते कष्ट में उसी को याद भी करते हैं,
इस रुकी हुई रात को फिर से चलाकर एक नए सवेरे का इंतजार करना होगा। इस रुकी हुई रात को फिर से चलाकर एक नए सवेरे का इंतजार करना होगा।
जिनके होती पारदर्शी नजर वो बनते जिंदगी में समंदर जिनके होती पारदर्शी नजर वो बनते जिंदगी में समंदर
लगता है तूफाँ सफ़ीने से आ के रिश्ते निभाते हैं ! लगता है तूफाँ सफ़ीने से आ के रिश्ते निभाते हैं !
वो मेरे बारे में कहाँ सब जानते हैं हाँ एक लेखिका ही तो हूँ। वो मेरे बारे में कहाँ सब जानते हैं हाँ एक लेखिका ही तो हूँ।
तुम एक विशाल विस्तृत अशेष अछोर शब्दकोश हो तुम एक विशाल विस्तृत अशेष अछोर शब्दकोश हो
जिंदगी में दुश्वारियों को ढोते ढोते अब यकीन होने लगा है मुझे। जिंदगी में दुश्वारियों को ढोते ढोते अब यकीन होने लगा है मुझे।
सच बता ,ऐ जिंदगी, तू इतना भरमाती क्यूं है? सच बता ,ऐ जिंदगी, तू इतना भरमाती क्यूं है?
मन से जल कोयला बन राख हो जाओगे अंदर से बने तो दिल से हीरा कहलाओगे। मन से जल कोयला बन राख हो जाओगे अंदर से बने तो दिल से हीरा कहलाओगे।
कटू शब्द हिय शूल चुभोता, परिजन को तरसाये। ऐसे शब्द कहाँ से लाऊँ, जो पीड़ा दर्शाये।। कटू शब्द हिय शूल चुभोता, परिजन को तरसाये। ऐसे शब्द कहाँ से लाऊँ, जो पीड़ा दर्श...
याद आता है वो गाँव का, सादा , निर्मल मौसम। याद आता है वो गाँव का, सादा , निर्मल मौसम।
मुहब्बत एक खुश्बू है, हमेशा साथ चलती है ज़माना आहे भरता है, जब उसकी बात चलती है। मुहब्बत एक खुश्बू है, हमेशा साथ चलती है ज़माना आहे भरता है, जब उसकी बात चलती...
सच्चाई, सौदेबाजी से पाती है पहचान। रक्त सने हाथों में जीनाजीवन का पर्याय। सच्चाई, सौदेबाजी से पाती है पहचान। रक्त सने हाथों में जीनाजीवन का पर्याय।
मैंने सीखा है यहाँ, सलीका बंदगी का, मैंने जिया है यहाँ, हर लम्हा जिंदगी का। मैंने सीखा है यहाँ, सलीका बंदगी का, मैंने जिया है यहाँ, हर लम्हा जिंदगी का।
मैं गोधूलि और संध्या के समय रो लेती हूँ जो शून्य करता है मेरा होना... मैं गोधूलि और संध्या के समय रो लेती हूँ जो शून्य करता है मेरा होना...
मैं आकाश को सकारात्मक विचारो वे रंग दूँ । मैं आकाश को सकारात्मक विचारो वे रंग दूँ ।