STORYMIRROR

Aapki Kavyatri

Others

4  

Aapki Kavyatri

Others

स्त्री

स्त्री

1 min
14

 दुर्गा भी है वो काली भी है कभी अन्नपूर्णा तो कभी वैशाली भी है 

वो मां भी हे तो मासी भी है, कभी शिक्षिका भी तो कभी झांसी भी है


 कभी रानी पदमवाती सा साहस उसमे है तो कभी

 हाड़ी की रानी सी कर्तव्यनिष्ट तो कभी काशी सी शांत भी है


वो जल की शांत धारा तो कभी समुंद्र का तूफान भी है

वो फूल सी कोमल भी तो कभी पत्थर सी कठोर भी है 


 थकना ,हारना व डरना ना कभी जिसने सीखा 

जो टूटी हिम्मत को जोड़ दे ऐसी वो जादूगरनी भी है 


उसे रोज सवेरे खाना कपड़े व बच्चो को जगाना है तो

फिर बच्चो को पढ़ना व शाम के खाने में भी लग जाना है 


मैं ठीक हूं यही कहना है हर बार और 

कभी अपनी परेशानी जताना न है 


अपनी दिनचर्या में सबको शामिल कर खुद को भूल जाना है 

साड़ी से खुदको सजाना पर कभी खुदको निहारना भूल जाना हे 


जो अपनो के लिए व्यस्तता में खोकर खुद को भूल जाती है

सम्मान करे हम आज उसका जिसने इतना साथ दिया है 


अपने सपनो को परे रख हमारे सपनो को प्रकाश दिया है 

आओ सम्मान करे उस स्त्री का जिसने इतना साथ दिया है।

                



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Aapki Kavyatri

मां

मां

1 min पढ़ें

चाय

चाय

1 min पढ़ें

वाह

वाह

1 min पढ़ें

परी

परी

1 min पढ़ें

Maa

Maa

1 min पढ़ें

साथ

साथ

1 min पढ़ें

समझता

समझता

1 min पढ़ें

बेटी

बेटी

1 min पढ़ें