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Aapki Kavyatri

Abstract

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Aapki Kavyatri

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Maa

Maa

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कहती कुछ नहीं बस अलग अलग तरीको से प्यार जताती है

मेरे आधी रोटी मांगने पर पूरी रोटी दे जाती है


कहती है इतने से घी से कुछ नही होता इस कहकर

मेरी थाली में ओर घी डाल जाती है


ये ब्रेड बटर जैसा कोई डिश नही है मा के ब्रेकफास्ट मेन्यू में

मा तो सूजी या आटे का हलवा बनाती है ब्रेकफास्ट में


कहती है जिम जाने की कोई जरूरत नहीं

को कहता है तू मोटी है बता मुझको


जब भी घर पहुचती हु पहला शब्द माँ कहा है

यही मुँह से निकलता है


मा मेरा ये समान कहा है वो समान कहा है

मिल जाय समान फिर भी माँ से पूछने को मन करता है


माँ ही जानत है माँ से ही दुनिया है

यह हर बार कहने को मन करता है।


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