खुद से एक मुलाकात की जाए
खुद से एक मुलाकात की जाए
बहुत दिन हो गए, ख़ामोशी में, खुद के साथ वक़्त बिताए,
ए दिल चलो आज कहीं उलझनों से थोड़ा दूर जाया जाए,
जाने कितने दिन बीत गए, खुद को जाना नहीं, सुना नहीं,
तो चलो आज खुद से खुद की, एक मुलाकात ही हो जाए,
दुनिया की हलचल न हो जहांँ कोई,ख़ामोशी में कुछ पल,
अपने अंतर्मन को टटोलकर, खुद की ही तलाश की जाए,
ज़िन्दगी की पटरी पे ख्वाहिशों की गठरी लिए दौड़ रहा हूँ,
चलो ख्वाहिशें उतार, खुद के लिए भी कुछ पल चुना जाए,
अपनी पहचान बना सकूँ, सोचने का था कभी वक़्त कहाँ,
आज दिल में दफ़न उन ख़्वाबों को, थोड़ी उड़ान दी जाए,
ना जाने कितना कुछ छूटा पीछे, कभी मुड़कर कहाँ देखा,
कुछ वक़्त निकालकर चलो, उन पलों की तलाश की जाए,
बहुत सुनी दुनिया की, बहुत थाम चुका मैं, औरों का हाथ,
अब खुद के साथ ही एक नए सफ़र की शुरुआत की जाए,
एक ऐसा सफ़र जिसमें मेरी पहचान, मेरा स्पष्ट वज़ूद हो,
मन को नई दिशा दिखाए जो, रोशनी की तलाश की जाए,
मैं ज़िन्दगी से भटका राहगीर, खुद के अंदर समाता गया,
आज जिंदगी को गले लगाकर, हर लम्हा गुनगुनाया जाए,
कितने मोड़ गुज़रे ज़िन्दगी के, आज एक मोड़ पे रुककर,
वक़्त के तहख़ाने में बंद, हर लम्हा जी भरकर जिया जाए,
थक चुका हूँ अजनबी राहों पर, साँसों को गिनती -गिनते,
अब तक बस कट रही थी ज़िंदगी अब थोड़ा जिया जाए।
