खुद की तलाश में,निकला हूं मैं
खुद की तलाश में,निकला हूं मैं
हूं खुद की तलाश में, निकला हूं मैं,
हूं समुंदर की लहरों सा, उभरा हूं मैं।
हूं भयभीत, परेशान मगर, मुश्किलों में सम्भला हूं मैं,
हूं अनन्त की प्यास, परन्तु फिर भी शून्य से गुज़रा हूं मैं।
हूं मंजिल की तलाश, रास्तों में बिखरा हूं मैं,
हूं खुद के ज़ीने की आस परन्तु, तिल-तिल मरा हूं मैं।
हूं कितनी बार हरा, फिर भी जीत के लिए बढ़ा हूं मैं,
हूं अग्निपथ पर, हर दम कठिनाइयों से लड़ा हूं मैं।
