STORYMIRROR

Manju Saraf

Abstract

3  

Manju Saraf

Abstract

कहर

कहर

1 min
268

सोलह जून दो हज़ार तेरह

को आया ऐसा सैलाब,

केदारनाथ में बहा कर ले गया

हज़ारों के घर असबाब।


प्रकृति ने सब पर उस

वक्त ढाया ऐसा कहर,

जल प्रलय में खो गए गाँव

और पता नही कितने शहर।


लोगों के मन में छाया था हर वक्त डर,

जाने कब किसे बहा कर ले जाये

बारिश का ये डरावना मंजर।


हो गए लाखों लोग वहाँ घर से बेघर ,

जाने कितनों के खो गए हमसफ़र , 

 ज़िन्दगी का सफर फिर भी जारी है,

नियति के आगे जीने का फ़लसफ़ा भारी है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract