खोए हम भी थे
खोए हम भी थे
खोए हम भी थे
खुद की आँखों मे गिरे हम भी थे
करवट बदल कर रोये हम भी थे
गलतियां दोनों तरफ से हुई थी
या खुद की थी
पस्यताप का ठेका ज़माना को ना दे के
रब को दे और आगे बढ़
कितने लोगो सफाइयाँ देता रहेगा
इनको फर्क नहीं पड़ता पगले
जिसको फर्क पढता वोह साथ कब का छूट गया।
