खो गया है वो इतवार…..
खो गया है वो इतवार…..
खो गया है वो इतवार, जिसका रहता था इंतज़ार,
छूटा समय के उस पार, ढूँढ़ो फिर से वो इतवार।
जिसका रहता था इंतज़ार, खो गया है वो इतवार…..
उठते थे जब आठ पर, अंगड़ाई लेते रहते खाट पर,
वो कचोरी-जलेबी का नाश्ता, फिर करने की बाट है।
जिसका रहता था इंतज़ार, खो गया है वो इतवार…..
इकठ्ठे होते थे मेज पर, खाते कुछ पड़ोसी को भेज कर,
बातें होती थी बेफिकर, उदासी पसरी है अब उस मेज़ पर।
जिसका रहता था इंतज़ार, खो गया है वो इतवार…..
खलिहानों की वो शाम भी, कुछ ढेले आमों के नाम थी,
पुआलों पर फिसलती ज़िन्दगी, कहानी से सजती रात थी।
जिसका रहता था इंतज़ार, खो गया है वो इतवार…..
चलती साँसों में शोर है, उसकी यादों का ज़ोर है
भागते दिल को करार नहीं, वक़्त का कैसा ये दौर है
जिसका रहता था इंतज़ार, खो गया है वो इतवार…..
ज़िन्दगानी उदास है, वो इतवार अब किसके पास है,
वक़्त की नदिया मुड़ ज़रा, फिर फुरसत की प्यास है।
जिसका रहता था इंतज़ार, खो गया है वो इतवार…..
