STORYMIRROR

yasmeen abbasi

Tragedy

4  

yasmeen abbasi

Tragedy

खिलौना

खिलौना

1 min
234


आदमी के लिए औरत 

केवल एक खिलौना भर ही तो है 

और जब औरत को 

पता चलता है कि 

वह ऐसे कई खिलौनों से 

खेल चुका है अब तक

और अब वे तमाम खिलौने

उसके लिए बेकार हो चुके हैं 

जिनसे वह अब तक 

खेलता आ रहा था

दिल बहलाने के लिए 

और अब वह खुद भी

एक खिलौने के रूप मे 

उसके मन की पहली पसंद 

बनी हुई है 

यहाँ यह काबिले गौर है कि 

नये खिलौने रूपी 

इस औरत को भी 

बेहद प्रिय है यही 'खिलाड़ी'

बावजूद यह जानते हुए कि

उससे खेलने वाला यह 'खिलाड़ी'

एक दिन फेंक देगा उसे भी 

उन्हीं खिलौनों की तरह 

या किसी मूरत की भांति 

एक कोने में ले जाकर 

खड़ा कर देगा 

और उसकी जगह 

दिल बहलाने के लिए

ले आएगा फिर कोई 

एक और नया खिलौना 

उफ्फ !

फिर भी यह 

नया खिलौना रूपी औरत 

यह रत्तीभर भी मानने को तैयार 

नहीं है कि 

एक दिन वह भी 

पड़ी होगी किसी कोने में 

कबाड़ हो चुके 

उन बाकि 'खिलौनों की तरह!

       


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy