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Manisha Kumar

Abstract Inspirational Children

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Manisha Kumar

Abstract Inspirational Children

खिचड़ी

खिचड़ी

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कंही खिचुरा, कहीं खिसुरी, कहीं पोंगल, तो कहीं दाल भात के नाम से जानी जाती है खिचड़ी
हर प्रांत और हर शहर में अपने विशिष्ट मसालों और विशिष्ट तरीकों से पकाई जाती है खिचड़ी
 जब परोसी जाती है दही,पापड़,घी,अचार जैसे चार दोस्तों के साथ तो स्वाद में हर व्यंजन को पीछे छोड़ जाती है खिचड़ी
 कभी बनती है रोगी का पथ्य, तो कभी सेवा के लिये मुफ्त वितरित की जाती है खिचड़ी
 गरीब की टूटी फूटी थाली से लेकर रेस्तरां के सजे संवरे मंहगे बर्तनों में भी परोसी जाती है खिचड़ी
 माघ के सर्द माह में जब सूर्यदेव करते हैं उत्तरायण, तो मकर संक्राति का मुख्य आहार बन जाती है खिचड़ी
 कभी बनती है माता जीजा की नसीहत,तो कभी बीरबल के किस्सों का हिस्सा बन जाती है खिचड़ी
 जब मिलता है दाल का प्रोटीन,चावल का कार्बोहाईड्रेट,हींग जीरे का पाचन और घी की सुगंधित स्निग्धता , तो एक संपूर्ण आहार बन जाती है खिचड़ी
 चाहे हो रेस्टोरेंट का नफासती अंदाज, या फिर माँ के हाथ का प्यार भरा स्वाद, जब गर्मागर्म थाली में परोसी जाती है तो क्षुधा और आत्मा दोंनो को तृप्त कर जाती है खिचड़ी
 तो आईये छोड़कर ये पिज्जा,बर्गर, हम सब मिलकर खाते हैं स्वाद और सेहत से भरपूर ये जायकेदार खिचड़ी
 


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