Prachi Chachondhiya
Fantasy
अंतर्मुखी
बॉल नाईट
माँ-पापा
ज़िंदगी
ख़्वाब
बेटियाँ
वो उड़कर देखते हैं मैं भी उन्हें देखा करूं वो उड़कर देखते हैं मैं भी उन्हें देखा करूं
कोइ देखने लगा है रस्ता मेरा तेरी गलियों से अब निकलना पड़ेगा। कोइ देखने लगा है रस्ता मेरा तेरी गलियों से अब निकलना पड़ेगा।
सब को कहां मिल पाते हैं जीवन के छुपे खज़ाने ! सब को कहां मिल पाते हैं जीवन के छुपे खज़ाने !
छोटी-छोटी नोक झोंक भी हर रिश्ते में चलती रहती है छोटी-छोटी नोक झोंक भी हर रिश्ते में चलती रहती है
मेरे कहे अनुसार ये दुनिया चले जो ना सुने उसे इस दुनिया से मिटाऊँ मेरे कहे अनुसार ये दुनिया चले जो ना सुने उसे इस दुनिया से मिटाऊँ
नहीं तो हर दाग और धूल लोगों की तेरे दरिया से धोने का नहीं तो हर दाग और धूल लोगों की तेरे दरिया से धोने का
लिखता है हर एहसास बिना लाग-लपेट के वो आम ज़िन्दगी से रोज़ सवाल चुनता है लिखता है हर एहसास बिना लाग-लपेट के वो आम ज़िन्दगी से रोज़ सवाल चुनता है
जो गरीबों को पनाह दे, वह है जिन्दगी। जो गिरते हुओं को थाम ले, वह है जिन्दगी।। जो गरीबों को पनाह दे, वह है जिन्दगी। जो गिरते हुओं को थाम ले, वह है जिन...
जानवरों की इस सोच पर हुए हम फिदा, इन्सानों ने इसी सोच को कर दिया विदा l जानवरों की इस सोच पर हुए हम फिदा, इन्सानों ने इसी सोच को कर दिया विदा l
जानती वो हमें हमसे ज्यादा, जरूरत हमारी सारी वो पूरी करती, जानती वो हमें हमसे ज्यादा, जरूरत हमारी सारी वो पूरी करती,
ज़िंदगी के उलझे पन्नों पर मेरे, कलम ने ली जब अंगड़ाई थी। ज़िंदगी के उलझे पन्नों पर मेरे, कलम ने ली जब अंगड़ाई थी।
हिंदी है हिंदूत्व का प्राण हमारी भाषा, हमारी जान हिंदी है हिन्दुस्तान की पहचान। हिंदी है हिंदूत्व का प्राण हमारी भाषा, हमारी जान हिंदी है हिन्दुस्तान की प...
ये कैसा अनुशासन कैसी चक्की घूम रही पहर निकलते समय साथ गति बढ़ती रही, ये कैसा अनुशासन कैसी चक्की घूम रही पहर निकलते समय साथ गति बढ़ती रही,
क्यों हम सताएं किसी को? क्यों हम रुलाएं किसी को? क्यों हम सताएं किसी को? क्यों हम रुलाएं किसी को?
आधी रात को आँखों में जो मंजर आये ,सुबह वो याद भी रहे ये जरूरी नहीं लोग कहते हैं जिसको ख़्वाब। ..वो क... आधी रात को आँखों में जो मंजर आये ,सुबह वो याद भी रहे ये जरूरी नहीं लोग कहते हैं ...
जो देखे आज़म को वफ़ा से हमेशा ख़ुदा कोई ऐसी नजरें चाहता हूँ। जो देखे आज़म को वफ़ा से हमेशा ख़ुदा कोई ऐसी नजरें चाहता हूँ।
पर्यावरण से दोस्तो सब प्यार कीजिए पोलोथीन का अब बहिष्कार कीजिए। पर्यावरण से दोस्तो सब प्यार कीजिए पोलोथीन का अब बहिष्कार कीजिए।
क्यूँ आये थे यहॉं तुम क्या करना था और कर क्या अब रहे हो, समय क्यों खो रहे हो। क्यूँ आये थे यहॉं तुम क्या करना था और कर क्या अब रहे हो, समय क्यों खो र...
वो फिर नहीं आती दुबारा, मुझे सुलाने को जो मैं एक क्षण के लिए, आराम भी कर लूं वो फिर नहीं आती दुबारा, मुझे सुलाने को जो मैं एक क्षण के लिए, आराम भी कर लूं
यही संदेश है ओस की बूंदों का इसे जान ले जो वही सुखी इंसान है। यही संदेश है ओस की बूंदों का इसे जान ले जो वही सुखी इंसान है।