Prachi Chachondhiya
Fantasy
अंतर्मुखी
बॉल नाईट
माँ-पापा
ज़िंदगी
ख़्वाब
बेटियाँ
आती है तकिये पर हर रात चुलबुली, शोख़ सी अपनी तमाम बातें लेकर पढ़ने को मेरी ख़ामोशी आती है तकिये पर हर रात चुलबुली, शोख़ सी अपनी तमाम बातें लेकर पढ़ने को म...
आह ! हृदय विदारक चीख मेरे होठों से फूट पड़ी ! आह ! हृदय विदारक चीख मेरे होठों से फूट पड़ी !
इस स्वप्निल संसार का...न आदि न अंत। इस स्वप्निल संसार का...न आदि न अंत।
बेबसी ही वजह थी दुश्मनी की, वरना फसाद कोई चाहता नहीं था। बेबसी ही वजह थी दुश्मनी की, वरना फसाद कोई चाहता नहीं था।
एक अरसा बीत गया, दम भर कर मुस्कुराये हुए। एक अरसा बीत गया, दम भर कर मुस्कुराये हुए।
मैं उठी सहमकर पलकें झपकायी, फिर गुनगुनायी उसे देखकर मैं उठी सहमकर पलकें झपकायी, फिर गुनगुनायी उसे देखकर
शनिवार और रविवार के बीच काश होता एक दिन और छुट्टी का, शनिवार और रविवार के बीच काश होता एक दिन और छुट्टी का,
मर्यादा की बेड़ियों में, अब ना कहो कुढ़ने को। तोड़ कर ये बेड़ियाँ, आसमान से जुड़ने दो। मर्यादा की बेड़ियों में, अब ना कहो कुढ़ने को। तोड़ कर ये बेड़ियाँ, आसमान से...
ताज़ा हुई यादें मोह्ब्बत की उस गुलबदन से मुस्कुरा दिया हमने और बस बेकस बनकर रह गया ताज़ा हुई यादें मोह्ब्बत की उस गुलबदन से मुस्कुरा दिया हमने और बस बेकस बनकर र...
स्वेच्छा को साकार जो कर दे, बनना ऐसे तुम विरले। स्वेच्छा को साकार जो कर दे, बनना ऐसे तुम विरले।
जहां पहुंचने का ख्याल भी न आया हो किसी को हाँ मैं ऐसी ही किसी जगह जाना चाहता हूँ। जहां पहुंचने का ख्याल भी न आया हो किसी को हाँ मैं ऐसी ही किसी जगह जाना चाहता...
मिल गया यहीं सभी आज हमें जीवन में, मिल गया यहीं सभी ! मधुर मधुर चाँदनी , छिटका रही छवि ! कल्पना... मिल गया यहीं सभी आज हमें जीवन में, मिल गया यहीं सभी ! मधुर मधुर चाँदनी , छिट...
जय होगी आदमी जैसे भगवान की। जय होगी आदमी जैसे भगवान की।
किसी का किसी पर न प्रभाव रहता मन में संतुष्टि का भाव रहता। किसी का किसी पर न प्रभाव रहता मन में संतुष्टि का भाव रहता।
छूटा वक्त फिर से न रुबरु हो जाए, दराजों में सहेजें लम्हें न बिखर न जाए। छूटा वक्त फिर से न रुबरु हो जाए, दराजों में सहेजें लम्हें न बिखर न जाए।
रख लेती हूँ तुम्हें हथेली पर शबनम बन शरमाती क्यों है छोड़ चलूँ मैं तुमको जब आवाज़ देकर रख लेती हूँ तुम्हें हथेली पर शबनम बन शरमाती क्यों है छोड़ चलूँ मैं तुमको जब...
इस कागज़ को बीचो बीच किसने फाड़ दिया रंग भी इधर से उधर हो गए अब सात समंदर पार कैसे जाएँगे ? इस कागज़ को बीचो बीच किसने फाड़ दिया रंग भी इधर से उधर हो गए अब सात समंदर...
सूर्य के पास हो के भी मुझे हुआ शीतलता का अनुभव बड़े अद्भुत संगम से मुझे मिला ऐसा वैभव सूर्य के पास हो के भी मुझे हुआ शीतलता का अनुभव बड़े अद्भुत संगम से मुझे मिला ऐ...
लो, मेरी छाया को ले लो लो, मेरी रूह को ले लो लो, मेरे एहसास को ले लो, इसे अपना लो। लो, मेरी छाया को ले लो लो, मेरी रूह को ले लो लो, मेरे एहसास को ले लो, इ...
ना खींच के हाथ उसका छल से तोड़ पाएगा लक्ष्मण रेखा का घेरा ना खींच के हाथ उसका छल से तोड़ पाएगा लक्ष्मण रेखा का घेरा