Prachi Chachondhiya
Fantasy
अंतर्मुखी
बॉल नाईट
माँ-पापा
ज़िंदगी
ख़्वाब
बेटियाँ
तब ये दुनिया भी कितनी हसीन और खूबसूरत हो जाएगी। तब ये दुनिया भी कितनी हसीन और खूबसूरत हो जाएगी।
बाँट ले उससे तू अपनी चिंताओं, अवसादों की घड़ी... बाँट ले उससे तू अपनी चिंताओं, अवसादों की घड़ी...
जोश की चिंगारी लगा दूँ । आह की लपटे बुझवा दूँ । शार्क से पहरा लगवा दूँ । जोश की चिंगारी लगा दूँ । आह की लपटे बुझवा दूँ । शार्क से पहरा लगवा दूँ ।
जिनका इश्क परमान चढ़ा हो उन दिलों को कभी जुदा न करें। जिनका इश्क परमान चढ़ा हो उन दिलों को कभी जुदा न करें।
हिन्द के रहने वालों आओ सब मिल कर हिन्दुतान हो जाएं। हिन्द के रहने वालों आओ सब मिल कर हिन्दुतान हो जाएं।
मुझमें समाहित हो मुझे एक मकसद दे जाती है। मुझमें समाहित हो मुझे एक मकसद दे जाती है।
सारी रात यों ही हंसते गाते बीत गई आंख खुली जो सुबह को मेरी तुम मुझको कहीं दिखी नहीं सारी रात यों ही हंसते गाते बीत गई आंख खुली जो सुबह को मेरी तुम मुझको कहीं...
उगते फूल आमों पर आती बहारें आमों की घनी छाँव तले पशु- पक्षी बना लेते शादी का पांडाल ये ही तो है ... उगते फूल आमों पर आती बहारें आमों की घनी छाँव तले पशु- पक्षी बना लेते शादी का ...
दिल में न रहे आह जिन्दगी तुझे जी भर जी लूँ। दिल में न रहे आह जिन्दगी तुझे जी भर जी लूँ।
चाँद की माँ के गले लगना है, उनको चरखा चलाते देखना है, ज़रा मैं भी तो जानूँ, वो चाँद ... चाँद की माँ के गले लगना है, उनको चरखा चलाते देखना है, ज़रा मैं भी त...
इस हरियाली के बीच और राह ही न मिले बाहर तक जाने की। इस हरियाली के बीच और राह ही न मिले बाहर तक जाने की।
कुछ हसरतों के धागों की चद्दर बुनी नक्काशी भी की जज़्बातो से रेशमी सिरे जोड़कर सिनी चाही एक तंग चोल... कुछ हसरतों के धागों की चद्दर बुनी नक्काशी भी की जज़्बातो से रेशमी सिरे जोड़कर ...
हर उस धागे सा लिपट के बुने सपनों सा होता जहान। हर उस धागे सा लिपट के बुने सपनों सा होता जहान।
चुरा धड़कन तेरे दिल की, मैं सरगम में पिरो लूँगा । तेरी पायल की छम-छम को, नए सुर में सजा लूँ... चुरा धड़कन तेरे दिल की, मैं सरगम में पिरो लूँगा । तेरी पायल की छम-छम को, ...
हाँ मगर जहाँ भी रहूं मैं मेरे अपनों को नहीं भूल पाऊँगा हाँ मैं एक दिन मर जाऊँगा। हाँ मगर जहाँ भी रहूं मैं मेरे अपनों को नहीं भूल पाऊँगा हाँ मैं एक दिन मर जाऊँ...
ऐसा संगदिल हसीं हो मेरा हमसफ़र। ऐसा संगदिल हसीं हो मेरा हमसफ़र।
दुर्योधन की हर शह को मात दे कर देखो। दुर्योधन की हर शह को मात दे कर देखो।
और मरने के बाद भी अपनी कविता से पहचाना जाऊँ। और मरने के बाद भी अपनी कविता से पहचाना जाऊँ।
सच लिख सके जो अब सदा ऐसा नया अखबार हो। सच लिख सके जो अब सदा ऐसा नया अखबार हो।
मेरी गुड़िया कभी न रोती हरदम वो हस्ती ही रहती, टुकुर-टुकुर वो देखे सबको मेरी गुड़िया कभी न रोती हरदम वो हस्ती ही रहती, टुकुर-टुकुर वो देखे सबको