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Avinash Mishra

Abstract


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Avinash Mishra

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खाक में मिल जाना है

खाक में मिल जाना है

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न तुम राम हो और न रावण मैं।

न तुम अमर हाे, न क्षणभंगुर मैं।।

एक दिन मराेगे तुम, मरूंगा मैं भी।

न तुम पुजोगे, न आलोचा जाऊंगा मैं।।

तुम भी मिलाेगे खााक में, मिलूंगा मैं भी।

किस बात का तुम करोगे गर्व, किसका मैं।।


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