काया किस काम की।
काया किस काम की।
अच्छे कर्मों का है यह फल, जो काया मिली इंसान की
फिर भी तू इठलाता घूमे, फिर काया तेरे किस काम की
भवसागर में डूब जाएगा, जर्जर नाव पुरानी है
पतवार की जरूरत आन पड़ी, राह तेरी अंजानी है
करुणा के सागर को अब तो पुकार ले, फिर काया तेरे किस काम की
अच्छी संगत तू अपना ले, कर मार्जन अपने अंतर्मन की
साबुन- तेल से काम ना चलेगा, जरूरत है अच्छे कर्मों की
शाम -सवेरे भजन तू उसका कर ले, फिर काया तेरी किस काम की
इन नैनों में तू उसे बसा ले, जो मालिक है संसार का
उसकी दया जब तुझ पर होगी, तो इंसान बनेगा काम का
हृदय पटल में उसको बैठा ले, फिर काया तेरे किस काम की
स्वासों की कोई गिनती नहीं है, सोच मत तू अब दूर की
एक दिन जीवन डगर यह खत्म होगी, देर मत कर अच्छे काम की
समय रहते "नीरज" उसको प्राप्त कर ले, फिर काया तेरे किस काम की।
