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Prashant Subhashchandra Salunke

Romance

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Prashant Subhashchandra Salunke

Romance

काश में होता किताब

काश में होता किताब

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काश में होता किताब तो

मुझे तलाशती नजरें तेरी


में छिप जाता मलबे में

और तू होती परेशान सी


में हँसता देखके तुझे

और तेरी नजरें रहती तलाशती मुझे


क्या होते वे दिन

क्या होता वो समा


जिसे तलाशता हूँ मैं आज

वह तलाशती मुझे।


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