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Prashant Subhashchandra Salunke

Romance

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Prashant Subhashchandra Salunke

Romance

हम बन बैठे शायर

हम बन बैठे शायर

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महोब्बत में हम किताब में खो गए

लिखते तुझे देख शायरी और गजल


तुम्हसे जुड़े छुडाते गए हम हर पजल

पन्नो में उलझी सी जिंदगी जैसे नजर


माशूक होने का था मन में मजर

लेकिन ठुकरा गई तू और हम...

अजी हम बन बैठे शायर.


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