Prashant Subhashchandra Salunke
Children
एकदिन हमको मिला एलियन
नाम था उसका डेलियन
उसका रंग था हरा.
राजू देख उसे डरा
लेकिन वेह था मिलनसार
हमको दिया इडली सांभर
खाके उसे हम रह गए दंग
फिर खूब मस्ती की एलियन संग।
कांप उठी धरती
कोरोना तूने ह...
फिल्मो की भी ...
अरे! ओ रे... ...
एकबार दिखा उड...
दिल में रहता ...
एकदिन हमको मि...
भागो भागो एलि...
भूल मत तेरा ...
हम बन बैठे शा...
और है बहुत कुछ खास और है बहुत कुछ खास
अपने जीवन में खुशियाँ भर लो पर्यावरण में जीवन भर दो ! अपने जीवन में खुशियाँ भर लो पर्यावरण में जीवन भर दो !
खेल-खेल में मेरा बाल-पुत्र सी.आई.डी. बन जाता है , अपनी नकली दुनाली से दनादन गोलियां ब खेल-खेल में मेरा बाल-पुत्र सी.आई.डी. बन जाता है , अपनी नकली दुनाली से दनादन ग...
मन में उठती उमंग रंगों में. मन में उठती उमंग रंगों में.
है वो जानवरों से भी बदत्तर होते जानवर फिर भी बेहतर। है वो जानवरों से भी बदत्तर होते जानवर फिर भी बेहतर।
यही गांव-गली के बच्चों का, चंदा मामा कहलाता है। यही गांव-गली के बच्चों का, चंदा मामा कहलाता है।
अचानक सब लौट आए हैं अचानक सब लौट आए हैं
और कितने नाम सुनोगे, नहीं कमजोर जो जुल्म सहेगी। और कितने नाम सुनोगे, नहीं कमजोर जो जुल्म सहेगी।
ख़ुशियाँ है मुझसे तभी तक जब तक हूँ मैं भली भली। ख़ुशियाँ है मुझसे तभी तक जब तक हूँ मैं भली भली।
वायरस से तुम बच न पाओगे इससे तुम लड़ न पाओगे बेहतर है तुम्हारे लिए घर के अन्दर रहन वायरस से तुम बच न पाओगे इससे तुम लड़ न पाओगे बेहतर है तुम्हारे लिए घर...
नाम था जिसका होलिका नाम था जिसका होलिका
ना पैसा ही ना चांदी सोना कुछ भी काम है नहीं आना l जल ही गर हम बचा सके ना धरा पर ना पैसा ही ना चांदी सोना कुछ भी काम है नहीं आना l जल ही गर हम बचा सके ना...
चालीस डिग्री तापमान है जिस्म से टपक रहा पसीना भट्टी सा घर तपता अपना मुश्किल है चालीस डिग्री तापमान है जिस्म से टपक रहा पसीना भट्टी सा घर तपता अपना ...
वृक्षों को है लगाना,प्रकृति को है बचाना, एक वृक्ष को लगाना ब देखभाल करना, बराबर है सौ पुत्रों ... वृक्षों को है लगाना,प्रकृति को है बचाना, एक वृक्ष को लगाना ब देखभाल करना, ...
स्वच्छ हवा झुला रही लोरी सी सुना रही मंद मंद मुस्कुरा रही स्वच्छ हवा झुला रही लोरी सी सुना रही मंद मंद मुस्कुरा रही
समझो खुद को और लक्ष्य का ध्यान करो, यूं ना बैठकर बीच राह में, मंजिल का इंतजार करो, समझो खुद को और लक्ष्य का ध्यान करो, यूं ना बैठकर बीच राह में, मंजिल का ...
आओ, अपने अंदर के कोलंबस को जगाएं बचपन की दुनिया ढूंढ लाएं ! आओ, अपने अंदर के कोलंबस को जगाएं बचपन की दुनिया ढूंढ लाएं !
पृथ्वी बनी आग का गोला , मौसम कहाँ नियंत्रित है ! दावानल हैं , ज्वालामुख हैं.... पृथ्वी बनी आग का गोला , मौसम कहाँ नियंत्रित है ! दावानल हैं , ज्वालामुख है...
हर एक मौसम में एक सा सुर एक सी आवाज़ रुनझुन, छुनछुन, झुनझुन। हर एक मौसम में एक सा सुर एक सी आवाज़ रुनझुन, छुनछुन, झुनझुन।
अब हो गई है देर काफी कल जल्दी लिखूँगी इसी के साथ शुभ रात्रि। अब हो गई है देर काफी कल जल्दी लिखूँगी इसी के साथ शुभ रात्रि।