STORYMIRROR

Bindiya rani Thakur

Classics

3  

Bindiya rani Thakur

Classics

काश कोई होता

काश कोई होता

1 min
199

काश कोई होता जो समझ जाता 

बिन कहे भी मेरे जज्बात 


जिसके लिए होती केवल मैं ही खास

मेरी खुशी उसके लिए अहम होती


मैं सर्वस्व होती उसकी और

उसके जीने की वजह होती।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics