Subodh Rajak
Romance Fantasy Inspirational
मैंने कहा था तुमसे
बहुत ही नाजुक है ये
फर्श पर गिर जाए तो
कांच की तरह टूट जाता है!
इस विषय में
कई सारे किताबें लिखी गई है
Online or offline मिल जाएंगे
पर तुमने पढ़ा नहीं
देखा! टूट गया न दिल!
कोरोना को हरा...
कांच का दिल
पत्थर
बूंद बूंद गिर...
मेरी माँ
दो बातों से..
भले जिस्म दो हों अकेला अधूरा वही प्रेम है जो रहे रूह वाला।। भले जिस्म दो हों अकेला अधूरा वही प्रेम है जो रहे रूह वाला।।
अपना लो और आ जाओ बांहों में, तुम्हें अपना गुलिस्तां बना दूँ अपना लो और आ जाओ बांहों में, तुम्हें अपना गुलिस्तां बना दूँ
ओस की नन्ही कंपकंपाती बूँद की तरह, जिसमें ठहरा है स्वादिष्ट लावा, जिसकी चाशनी में डूब ओस की नन्ही कंपकंपाती बूँद की तरह, जिसमें ठहरा है स्वादिष्ट लावा, जिसकी चा...
तो क्या ये सबका जुड़ना और लगाव अनायास यूँ ही होता? तो क्या ये सबका जुड़ना और लगाव अनायास यूँ ही होता?
सुरभित समीर के छूने से, गहन - अंध मिट जाते हैं. सुरभित समीर के छूने से, गहन - अंध मिट जाते हैं.
टिमटिमाते तारों की रोशनी में अक्सर तुम नज़र आ जाते हो टिमटिमाते तारों की रोशनी में अक्सर तुम नज़र आ जाते हो
युग का जब -जब भी आविरभाव होगा। राम तुम्हे तब-तब ही वनवास होगा। युग का जब -जब भी आविरभाव होगा। राम तुम्हे तब-तब ही वनवास होगा।
मेरी कल्पना क्या है रूप तुम्हारा ? मुझको भी बताओ, मेरी कल्पना क्या है रूप तुम्हारा ? मुझको भी बताओ,
तुम कभी फूलों सी तो कभी पंखुड़ी गुलाब की लगती हो। तुम कभी फूलों सी तो कभी पंखुड़ी गुलाब की लगती हो।
दिल के कोरे पन्नों पर मुस्कुराने की वजह लिख दो, तुम क्या चाहते हो एक बार हंस कर हमसे। दिल के कोरे पन्नों पर मुस्कुराने की वजह लिख दो, तुम क्या चाहते हो एक बार हंस...
चलो आज लिख के बयां करता हूँ सब ,,क्योंकि बोल तो आज भी न पाऊंगा। चलो आज लिख के बयां करता हूँ सब ,,क्योंकि बोल तो आज भी न पाऊंगा।
प्रिय लिखूँ प्रियतमा लिखूँ, बस मेरी लिखूँ या प्यारी भी संग, प्रिय लिखूँ प्रियतमा लिखूँ, बस मेरी लिखूँ या प्यारी भी संग,
ये दो शारीरिक आत्मायों की भूख है ,इस खेल में कोई हार - जीत नहीं। ये दो शारीरिक आत्मायों की भूख है ,इस खेल में कोई हार - जीत नहीं।
तेरे बिना जिंदा तो हैं लेकिन पत्थर बन गये हैं तेरे बिना जिंदा तो हैं लेकिन पत्थर बन गये हैं
रात ख्वाबों में अक्सर कुछ धुंधली-सी यादों का बसेरा हो जाता है। रात ख्वाबों में अक्सर कुछ धुंधली-सी यादों का बसेरा हो जाता है।
भावनाओं की जगह, तर्क हावी होने लगता है और जान का रुतबा भी बदलने लगता है। भावनाओं की जगह, तर्क हावी होने लगता है और जान का रुतबा भी बदलने लगता है।
मुझे बस इतना पता है तेरी जिंदगी का अहम हिस्सा हूं मैं,, मुझे बस इतना पता है तेरी जिंदगी का अहम हिस्सा हूं मैं,,
मै वो बारिश अभी भी देख सकता हूँ साथ महसूस कर सकता हूँ मिट्टी मे उठनेवाली वो सुगंध। मै वो बारिश अभी भी देख सकता हूँ साथ महसूस कर सकता हूँ मिट्टी मे उठनेवाली वो...
मैं जो कलम हूं तो स्याही तुम हो मैं अगर किताब हूं को पन्ना तुम हो मैं जो कलम हूं तो स्याही तुम हो मैं अगर किताब हूं को पन्ना तुम हो
अगर उनकी समस्याओं और परेशानियों को दूर करने के लिए कुछ किया जा सकता है। अगर उनकी समस्याओं और परेशानियों को दूर करने के लिए कुछ किया जा सकता है।