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Manjul Singh

Fantasy Others

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Manjul Singh

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काली औरतें

काली औरतें

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काली औरतें 

जब बात करती है 

तो आसमान भी 

काला हो जाता है

बहुत तेज चमकने 

वाला सूरज छोटे छोटे 

टुकड़ों में टूट कर 

बिखर जाता है!


काली औरतें 

सोचती है नये नये 

मनसूबे और काट 

देती है अपने ही 

तर्कों से!


काली औरतें

बाते करती है 

अपने गोरे प्रेमियों 

की जो च-रस की 

जगह श्रृंगार रस का 

सेवन उचित समझते है!


काली औरतें

के लिए आभूषण 

कोई सुन्दरता नहीं 

वो मन और तन 

का संवाद है!


काली औरतें 

लगाती है काजल, नाख़ूनी 

और महावर 

अपने गोरे प्रेमियों के 

पसंद की क्योंकि?

काली औरतों

की मांसल भुजाएँ

और सुडौल पिंडलियाँ 

खूब भाती हैं उनके 

गोरे प्रेमियों को!


काली औरतें

झुकाये नज़रें 

लेट जाती है

समर्पण में अपने 

गोरे प्रेमियों के लिए 

वो लिपटकर 

काली औरतों

के सपाट पेट पर 

बने गहरे कुएँ से 

पानी पी लेता है!

और क्यों कहता है 

निर्दयी नरनाशी

काली औरतें?



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