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V. Aaradhyaa

Inspirational

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V. Aaradhyaa

Inspirational

कालातीत व कालजयी है हिंदी

कालातीत व कालजयी है हिंदी

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सरस्वती के वाद्य से जैसे प्रकटी संस्कृत की बेटी,

कालातीत है और कालजयी भाषा है हिन्दी !

अक्षर वृह्म शब्द की सिंधु की परिमित भाषा है ,

जीवन की परिकल्पित शुद्ध परिभाषा है हिन्दी !


साॅ॑सें है अपने भारत की, भारत के भविष्य की ,

अपरिमीय अति प्रबल एक अभिलाषा है हिन्दी !

जो संपूर्ण देश को एक ही सूत्र में जोड़कर रखे ,

ऐसी ही सुदृढ़ और जन जन की भाषा है हिन्दी !


हमारी लेखनी व हमारी वाणी हमारा है सृजन,

व्याकरण है सर्वसमृद्ध व समग्र भाषा है हिन्दी !

हमारा संस्कार व हमारी अपरिमित संस्कृति है,

हमारा सुगढ़ और सुशाश्वत आचरण है हिन्दी !


हिन्दी हमारी अस्मिता है व हमारा है अभिमान ,

और हमारी शान और अतिव सम्मान है हिंदी !

सूरदास, तुलसी कवियों और ऋषि मुनियों का,

समृद्ध सज्ञान और एक सुमधुर गान है हिन्दी !


जैसे आज जड़ से कट रहे हैं हरे-भरे सुन्दर वृक्ष,

ऐसे तो कभी नहीं व कहीं नहीं हरे भरे रह पाते हैं !

कृतघ्न व अमानुष ज़ब नहीं करते माॅ॑ का सम्मान,

खुद जीवन में कभी नहीं सतत आगे बढ़ पाते हैं !


माॅ॑ की ममता और उसके असीम पोषण से ही,

शिशु बड़े और सुसंस्कृत और महान हो पाते हैं !

जो आन,शान से जीते हैं और जो प्यार लुटाते हैं ,

पर अपनी माॅ॑ का कभी गुणगान नहीं कर पाते हैं !


सभी सरितायें मिलतीं हैं जैसे अनंत सागर में ,

हिन्दी वह अतिशय एक अथाह सा सागर है !

हिन्दी मृदु शब्द नाद और लिपि का संसार है,

विश्वास का अनुपम व पावन अद्भुत आगर है !


फिर भी आज अनुनाद बनी खड़ी है हिन्दी,

अंग्रेजी भाषा खींच रही है कैसे विस्तृत चीर !

अंधे राजा हैं और बहरी सरकारें गूंगी जनता है,

हिन्दी झेल रही है कैसे लगातार निरंतर पीर !


नष्ट हो रही है देश की प्राचीन व गौरव गरिमा,

अंग्रेजी स्कूल बन रहे हैं जैसे कौरव से अधीर !

सजल अभागी हिन्दी तो अब प्रति पल रो रही,

भर भर नयनों में नीर किसे सुनाए अपनी पीर !


हिन्दी वीरों की तलवार जैसी बनती जा रही है ,

करे लेखनी से सतत व कलम का एक श्रृंगार है !

भारत माता का सर्वत्र और सर्वज्ञ ऊंचा भाल है ,

गंगा सी हिन्दी की बहती अविरल पावन धार है !


हिंदी के उत्थान हित आओ सब बनें भगीरथ,

करें स्वयं का और देवनागरी भाषा का उद्धार !

अंगरेजी से मानसिक दासता से मुक्ति पायें,

खोलें स्वर्णिम वैभव गौरव के स्वर्णिम द्वार !


महाकाल के वाद्य से प्रकटी संस्कृत की बेटी,

अमृत और कालजयी सुदृढ़ भाषा है हिन्दी !

अक्षर व्रह्म शब्द सिंधु है, जीवन की परिकल्पित,

अद्भुत और अति सुवासित परिभाषा है हिन्दी !



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