Sangeeta Modi
Tragedy
कागज की कश्ती थी,
दूर कहीं किनारा था।
खुशऩसीब थे हम,
यहाँ कोई तो हमारा था।
जब डूबने लगी कश्ती,
तो कोई पास ना आया।
खुशफहमी पल में दूर हो गई,
ना हम किसी के थे,
ना कोई हमारा था।
मेरी जिन्दादि...
पिता का अनकहा...
कागज की कश्ती
आसमान छूना है...
कामयाबी की मं...
आजकल नुकीले नाखूनों से वह औरत के पंखों को नोचने लगा है। आजकल नुकीले नाखूनों से वह औरत के पंखों को नोचने लगा है।
आखरी में निराश होकर लिखूंगा एक कविता आखरी में निराश होकर लिखूंगा एक कविता
आरज़ू थी हम मिलेंगे उनसे भी वो न आया क्यों रुलाया देर तक आरज़ू थी हम मिलेंगे उनसे भी वो न आया क्यों रुलाया देर तक
मैने भी भरी उड़ान कुछ समय, पर ज्यादा दूर मैं उड़ ना पाई, अपनी बौनी उड़ान के संग, फिर धरा पर वापस ... मैने भी भरी उड़ान कुछ समय, पर ज्यादा दूर मैं उड़ ना पाई, अपनी बौनी उड़ान के सं...
पल भर नहीं लगते अग्नि को प्रज्वलित होने में रुस्वाईयां के आंगन में, लगता है रो लूँ, ज़ी भर-भर ... पल भर नहीं लगते अग्नि को प्रज्वलित होने में रुस्वाईयां के आंगन में, लगता ह...
दृष्टी मिळेल संसारा वाट मिळेल जगण्याला.. दृष्टी मिळेल संसारा वाट मिळेल जगण्याला..
मोमबत्तियाँ जल जाती हर बार जुलूस भी निकाल लिये जाते मोमबत्तियाँ जल जाती हर बार जुलूस भी निकाल लिये जाते
तू रूठी रूठी सी क्यों है मुझसे ऐ जिंदगी बता मुझे मेरी क्या है खता ऐ जिंदगी तू रूठी रूठी सी क्यों है मुझसे ऐ जिंदगी बता मुझे मेरी क्या है खता ऐ जिंदगी
हाय, कितनी झीनी ओट में झरते रहे आलोक के सोते अवदात- और मुझे घेरे रही अँधेरे अकेले घर में अँधेरी ... हाय, कितनी झीनी ओट में झरते रहे आलोक के सोते अवदात- और मुझे घेरे रही अँधेरे अ...
आज पर हर अश्क दोगुना सा क्यों है मेरी माँ तेरा आंगन सूना सा क्यों है। आज पर हर अश्क दोगुना सा क्यों है मेरी माँ तेरा आंगन सूना सा क्यों है।
मंजिलों में जब कभी हों रास्ते रुसवा ख्वाबों की दहलीज की जब नींव हो तबाह क्यों हुई बदहाल सालों साल ... मंजिलों में जब कभी हों रास्ते रुसवा ख्वाबों की दहलीज की जब नींव हो तबाह क्यों ...
न जाने जिंदगी का कैसा है इम्तिहान, उड़ा इतना की, छोटा लगा सारा जहान, थी जिसकी तलाश मुझको, मिल... न जाने जिंदगी का कैसा है इम्तिहान, उड़ा इतना की, छोटा लगा सारा जहान, थी ज...
अब महफिलों को छोड़ जाना अच्छा लगता है, पलको पर अश्कों को सजाना अब अच्छा लगता है। अब महफिलों को छोड़ जाना अच्छा लगता है, पलको पर अश्कों को सजाना अब अच्छा लगता है।
स्याह रात भी रोशन थी कभी ये बात उसको बताऊं कैसे खामोशी समझती थी वो कभी अब धड़कन दिल की उसे सुनाऊं... स्याह रात भी रोशन थी कभी ये बात उसको बताऊं कैसे खामोशी समझती थी वो कभी अब धड़...
जब जाम छलकने लगे महफ़िल में हमसे एक जाम भी पिया ना गया नजर आ गया तेरा चेहरा जाम में दो नशों को ... जब जाम छलकने लगे महफ़िल में हमसे एक जाम भी पिया ना गया नजर आ गया तेरा चेहरा ...
ले रही है इम्तेहान दुखों के ज्वारभाटा से हम इससे न हारेंगें कभी तो आयेगा अपना वक़्त भी संतोष... ले रही है इम्तेहान दुखों के ज्वारभाटा से हम इससे न हारेंगें कभी तो आयेगा अ...
बेचैनियाें में जब कभी अरमान हों बिखरे गुलाब और ब्यूटी प्रोडक्ट से रूप जब निखरे तुम भी जिसमें फस चु... बेचैनियाें में जब कभी अरमान हों बिखरे गुलाब और ब्यूटी प्रोडक्ट से रूप जब निखरे ...
इनसे क्या करूँ उम्मीद मोहब्बत की जो प्रेम कहानियाँ सजाते हैं प्यार करने वालों की मौत पर इनसे क्या करूँ उम्मीद मोहब्बत की जो प्रेम कहानियाँ सजाते हैं प्यार करने वालो...
घर में जो बना वहीं थाली में लगा उन को समर्पित करो वहीं सही मायने में श्राद्ध है। घर में जो बना वहीं थाली में लगा उन को समर्पित करो वहीं सही मायने में श्र...
करवटें बदलने से, आदत नहीं बदलती, तुम लाख बदल लो चेहरे, फितरत नहीं बदलतीं, आईने में देखकर अपना अक्स... करवटें बदलने से, आदत नहीं बदलती, तुम लाख बदल लो चेहरे, फितरत नहीं बदलतीं, आईने...