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Sangeeta Modi

Tragedy

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Sangeeta Modi

Tragedy

कागज की कश्ती

कागज की कश्ती

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कागज की कश्ती थी,

दूर कहीं किनारा था।

खुशऩसीब थे हम,

यहाँ कोई तो हमारा था।


जब डूबने लगी कश्ती,

तो कोई पास ना आया।

खुशफहमी पल में दूर हो गई,

ना हम किसी के थे,

ना कोई हमारा था।


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