जो कर चली तू बदमाशियां
जो कर चली तू बदमाशियां
वो वक्त की जंजीर थी
वो प्यार का पहला सफ़र
वो हौले- हौले साँसें थी
जो ठहरे थे ग़म का पहर- x2
मेरे ख्वाब में बस तू ही तू
जो ले चली तू खामोशियां...
अब दिल नहीं लगता मेरा
जो कर चली तू बदमाशियाँ..-x 2
यूँही चाहा था तुझको मैं
वो अपनी अंदाज़ से
जो छुपता नही आज भी
तेरे ही वो हर अंजाम से - x2
कैसे कहूँ एहसास ये
जो कहती हैं धड़कन सर्गोशियाँ...
अब दिल नहीं लगता मेरा
जो कर चली तू बदमाशियाँ..-x2
मैं तुझमें था, तू मुझमें थी
ये जिसको अब नाम दूँ
लब में था तू जो आरजू
मैं कैसे तुझको शाम दूँ-x2
तू जो न हो अब मेरा तो..
लगती है अब तन्हाईयाँ...
अब दिल नहीं लगता मेरा
जो कर चली तू बदमाशियां..x2

