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Manoj Kumar

Romance

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Manoj Kumar

Romance

जो कर चली तू बदमाशियां

जो कर चली तू बदमाशियां

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वो वक्त की जंजीर थी

वो प्यार का पहला सफ़र

वो हौले- हौले साँसें थी

जो ठहरे थे ग़म का पहर- x2


मेरे ख्वाब में बस तू ही तू

जो ले चली तू खामोशियां...


अब दिल नहीं लगता मेरा

जो कर चली तू बदमाशियाँ..-x 2


यूँही चाहा था तुझको मैं

वो अपनी अंदाज़ से

जो छुपता नही आज भी

तेरे ही वो हर अंजाम से - x2

कैसे कहूँ एहसास ये

जो कहती हैं धड़कन सर्गोशियाँ...


अब दिल नहीं लगता मेरा

जो कर चली तू बदमाशियाँ..-x2


मैं तुझमें था, तू मुझमें थी

ये जिसको अब नाम दूँ

लब में था तू जो आरजू

मैं कैसे तुझको शाम दूँ-x2


तू जो न हो अब मेरा तो..

लगती है अब तन्हाईयाँ...


अब दिल नहीं लगता मेरा

जो कर चली तू बदमाशियां..x2


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