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Chandresh Kumar Chhatlani

Abstract

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Chandresh Kumar Chhatlani

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जो जलाना है तो

जो जलाना है तो

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जो जलाना है तो तुम

जला दो किसी का अश्रु-सागर।

जो फैंकना है पानी तो तुम

फैंक के ढहा दो दिलों की दीवारें।


जो रंगना है रंग तो तुम

रंग डालो घृणा और द्वेष को।

जो गाने हैं गीत तो तुम

गालो गीत मिलकर चरैवेति के।


जो उडाना है अबीर तो तुम

उड़ा दो खुशियों का अबीर।

मन की पिचकारी में भर के


प्रेम-ख़ुशी-हिम्मत-दया

आज खेल लो होली को तुम।


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