ज्ञान की पौथी
ज्ञान की पौथी
मिलती हूँ मैं हर घर में होती कुछ हल्की कुछ भारी हूँ
जिज्ञासा को दूर करती मैं भरी रहती ज्ञान से सारी हूँ
देती हर चीज की जानकारी हर सवाल की जवाबदारी हूँ
बच्चे हो या जवान या हो कोई वृद्ध सबकी राजदुलारी हूँ
कोई पूछे क्या हूँ तो बता दूँ मैं पूरी दुनिया की जानकारी हूँ
वेद ,शास्त्र,दोहे, कविता और कहानियों की मैं फुलवारी हूँ
मुर्खो के लिए बोझ हूँ और विद्वानों के लिए मैं कामगारी हूँ
ना मानों तो कागज का टुकड़ा और मानों तो दुनियादारी हूँ..
आती हूँ मैं हर जगह काम मान भी लो मै जरूरत तुम्हारी हूँ
जीवन जीने का हूँ तरीका सिखलाती मैं किताब तुम्हारी हूँ।
