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Dr Lalit Upadhyaya

Classics

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Dr Lalit Upadhyaya

Classics

ज्ञान है अनमोल

ज्ञान है अनमोल

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दौलत की तराजू पर ज्ञान जो तौल रहे हैं,

बचपन की मुस्कान को गोल वो कर रहे हैं।


बच्चे की भावना का कोई नहीं मोल है,

उनको समझना ही हमारे बोल है।


सबको पढ़ना भी जरूरी है,

भारी बस्तों की कैसी मजबूरी है।


खेल-खेल में सिखाओ फिर कैसी दूरी है,

चहुँमुखी विकास से ही शिक्षा पूरी है।


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