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Lakshman Jha

Inspirational


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Lakshman Jha

Inspirational


जन-गण नायक

जन-गण नायक

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बहुत कुछ 

लिखना चाहता हूँ 

पर कोई पढ़ता 

ही नहीं 

कुछ कहना चाहता हूँ 

पर कोई 

सुनता ही नहीं !


आँखें धुँधली सी 

हो गई है ,

सबकी आँखों में 

पतला सा 

माँस का परत 

जम गया है !


डॉक्टर कहते हैं 

यह पुराना 

रोग “टेरिजम” 

हो गया है !


बहाना तो अब 

हमें मिल गया है ,

कोई कुछ भी लिखे 

हमें क्या करना है ?


आवाजें उठती हैं 

चीखें बेबसी की 

दसों दिशाओं में 

फैलती है !


पर हम बधिर 

बन गए हैं,

“ब्लू टूथ“ के यंत्रों 

को अपने कानों में 

लगा रखे हैं !


मुझे किसी की 

व्यथाओं से क्या लेना ?

किसी का रोजगार 

छूट जाए तो क्या करना ?


किसी को 

दो वक्त की रोटी 

नहीं मिले तो 

क्या कर सकते हैं ?

मंहगाइयों की मार से 

कमर टूट जाए 

तो हम क्या कर सकते हैं ? 


हमें बिठाया है 

सिंहासन पर 

मुकुट नेतृत्व का 

पहनाया है,


हम अकर्मण्य बन भी 

गए तो क्या होगा ?

फिर भी हमें 

सबने अपनाया है !


और देशों में 

वहाँ के लोग 

उनकी कार्यशैली 

को देख कर रखते हैं !


पर यहाँ की बात 

कुछ और है,

पाँच सालों में 

अपने देश तक 

को बेच सकते हैं !


दर्द का एहसास 

उसी को होता है ,

जो सुईयों की चुभन को 

दिन- रात सहता है !


जगह का नाम बदलने से 

वहाँ की तस्वीर 

नहीं बदलती है !

वहाँ कुछ काम 

हो अद्भुत 

तभी कुछ बात बनती है !


अभी भी वक्त है 

कुछ काम करने का ,

व्यथा ,दर्द और ग्लानि 

से सबों को 

मुक्त करने का !


तभी इतिहास हमको 

सदा ही याद 

करता रहेगा !

हर जमाने में 

हमारी कृतियों 

का यशगान 

सदा होता रहेगा !


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