ज़ख्म जो मुस्कुराना सीखा गए।
ज़ख्म जो मुस्कुराना सीखा गए।
ज़ख्म जो मुस्कुराना सीखा गए।
वो ज़ख्म जो मुस्कुराना सीखा गया,
वो ज़ख्म जिसमें दर्द ही दर्द था,
वो ज़ख्म जिसमें गम में भी मुस्कुराना
पड़ता था,
वो ज़ख्म कभी चिखते थे सुन्नाटो मे,
आज उन्हें गुनगुना सीख लिया,
छुपाते थे गम हम कभी उन्हें देखकर,
आज उनकी तस्वीर को देखकर
मुसकुरा लेते हैं,
वो लम्हा आज भी हमे झंझोड़
कर रख देता है,
वो पल को याद करके आज भी
हम सहज जाते हैं,
वो काली घनेरी डरावनी रात,
और वो भयानक हादसा,
आज भी हमें दर्द दे जाता है,
वो हादसा जो खुशी के पल को,
गम और मातम में बदल गया,
एक ही पल में वो हाथ छोड़कर
चला गया,
उसके साथ मेरी सारी दुनिया डूब गई,
पर उसके यादों की निशानी छोड गई।
वो ज़ख्म ने फिर से मुस्कुराना सीखा दिया।
