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Jeetal Shah

Inspirational

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Jeetal Shah

Inspirational

खामोश इश्क

खामोश इश्क

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खामोश इश्क।


ख़ामोशी की आवाज,
 ऐसी होती हैं,
जैसे कोई आग कहीं,
 दबी हुई होती है।



ख़ामोशी में छुपा दर्द 
एसा होता है जैसे ,
कोई दिल पर भारी 
 पत्थर रखा होता है। 



ख़ामोशी एसी जो दिल में 
आग उबलती रहतीं हैं,
ख़ामोशी एसी जो कब 
ज्वालामुखी बन उभरेंगी।



खामोशी में छुपा है दर्द का सैलाब,  
फ़्रस्ट्रेशन की आग और चुपचाप 
सुलगती ज्वाला का क्या कहना।


आंसुओं की धारा बहती जाती,
दिल के अंदर घुटती, ये 
चीखें दबती जाती।

हर रोज कांटों से खेलते रहते,
आंसुओं के लहु से हम बहते रहते।

बाहर से मुस्कान, अंदरमे तूफ़ान
 छुपा हुआ,
ख़ामोशी की दीवारे भी 
अभी चुभने लगी।

फिर वो ज्वालामुखी फटने लगी,
चुप्पी जो थी वो उगलने लगी,
आग के गोलों में बहने लगी।


नजाने ये ख़ामोशी की जलन 
कब बुझेगी,
हमारे इश्क की ये कहानी अब
 कब बनेगी।







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