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bhavi tiwari

Tragedy

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bhavi tiwari

Tragedy

जिस्म की मंडी

जिस्म की मंडी

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दुनियां के बाजार में लगती रही जिस्मों की मंडी

दिल टूटता रहा जिस्म तार तार हुआ आवाज न आई

वो जो कहते रहे हम इश्क के पुजारी है

वही सबसे पहले खरीदार हुए आवाज़ न आई

गैरो से गिला करने की कोई वजह ढूंढ न सके

अपनो ने ही मंडी ये सजाई और आवाज न आई।



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