जिस्म की मंडी
जिस्म की मंडी
दुनियां के बाजार में लगती रही जिस्मों की मंडी
दिल टूटता रहा जिस्म तार तार हुआ आवाज न आई
वो जो कहते रहे हम इश्क के पुजारी है
वही सबसे पहले खरीदार हुए आवाज़ न आई
गैरो से गिला करने की कोई वजह ढूंढ न सके
अपनो ने ही मंडी ये सजाई और आवाज न आई।
