जिन्दगी
जिन्दगी
जिंदगी उस आस सी
जो कहीं तो है मचलती
पूर्ण इच्छाओ के राह पर
तो कहीं है यह तङपती
बेचैन मन के कराह पर।।
जिंदगी उस प्यास सी
जो कहीं तो है बुझती
प्राप्य हर एक नेेेमत पर
तो कहीं है यह सुुुुुलगती
तप्त रेगिस्तां के रेेत पर।।
जिंदगी उस रात सी
जो कहीं तो है खनकती
प्रदीप्त चाँद तारों के तेज पर
तो कहीं है यह सिसकती
चिन्तातुर निराशा के सेेज पर।।
जिंदगी उस बात सी
जो कहीं तो है घुुुुलती
कान में मिश्री की डली सी
तो कहीं है यह चुुुुभती
नग्न काॅटो पर कोमल कली सी।।
सच यह जिंदगी एक मीठा जहर
जश्ने गम मे इसको पियो
तूफां गम का ठहरा,गम मे हंसकर तो जियो।।
