STORYMIRROR

Kabita kumari Singh

Action

3  

Kabita kumari Singh

Action

ज़िंदगी के जाल में

ज़िंदगी के जाल में

1 min
229

जिंदगी के जाल में

लोग फंसते जा रहे हैं षड्यंत्र में

मोहरे के दाव पेंच में

तिलमिला उठा सांसद बौखला उठा कपटी नेता।

वोटों की गिनती में गरीब जनता को लूटता

उनके आशाओं को रौंदता

शोषित करता निम्न वर्ग को

चूसता उनका सार तत्व शेष छोड़ता हाड़

जल रूपी मन को उठने ना देता नभ में।

कुचलता उनके अरमान को

तृष्णा रूपी अग्नि में आहुति देता उनके इच्छाओं को।

छोड़ देता जन को तरसती

उस काग की भांति जो नीर की आस में

फिरता रहता उच्च महलों के द्वार।

फंसता रहता आम जनता नेताओं के कूटनीति में।

त्राहि माम त्राहि माम करता रहता सांसद

के दरबार में

फंसता रहता आम जनता 

जिंदगी के जाल में।

 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Action