ज़िन्दगी का दर्द
ज़िन्दगी का दर्द
ज़िन्दगी के दर्द को कोई क्या जाने,
तभी तो मुस्कुराकर दिखा देते हैं।
अगर जान भी जाए कोई तो,
दुखी होने से क्या लाभ,
हम उन्हें भी यही समझा देते हैं।
अरमान हमारे कोई क्या जाने,
उन्हीं के अरमान पूरा करने का
रास्ता बना देते हैं,
अपने अरमान ज़ाहिर हो भी जाए तो क्या,
दूसरे के अरमानों का सम्मान करना
सिखा देते हैं।
मक़सद हमारा कोई समझे या न समझे,
सबके लिए नया मक़सद बना जाते हैं,
मक़सद बताने से भी क्या होता है,
मक़सद ही ज़िन्दगी का मार्ग बना जाते हैं।
ज़िन्दगी के दर्द को कोई क्या जाने,
बस केवल मुस्कुराकर दिखा देते हैं।
