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Mohanjeet Kukreja

Inspirational

4.6  

Mohanjeet Kukreja

Inspirational

जीवनसार

जीवनसार

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जीवन...जैसे

किसी नवजात

शिशु की किलकारी.

पहले संभलना,

फिर अपने

पैरों पर खड़ा होना!


किसी भी

बढ़े हुए हाथ की

उंगली थाम कर,

नित नए

लक्ष्य की ओर

नन्हे-कदम बढ़ाना!


निरर्थक शब्द,

चाँद-सितारों

को छूने का हठ;

अंतत: थक कर,

माँ की

गोद में सो रहना!


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