Nitu Maharaj
Action Inspirational
कदम मजबूत रखिए वहां
जहां जमीन कमजोर हो रहा हो।
मुस्कान रखिए होठों पे तब
जब जिंदगी रुला रही हो।
खुशियों से भरा हो जिंदगी
ऐसा ही जीवन की रीत रखिए।
हार जाए सब कुछ अपना
फिर भी जीत की उम्मीद रखिए।
जो पहली बार ह...
हिन्दी से हिं...
नया सवेरा
आंखे
ये महंगाई
मै छू लूं गगन...
गरीब मासुम
कौन वहां
एक मीरा
संकल्प
तुम्हें ये सब बदलना है अपने जैसे लोगों के साथ मिलकर सबके लिए। तुम्हें ये सब बदलना है अपने जैसे लोगों के साथ मिलकर सबके लिए।
उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के निमित्त होता है। उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के नि...
तुम्हें पता नहीं यारों, तभी तो फौजी कहलाता हूँ। तुम्हें पता नहीं यारों, तभी तो फौजी कहलाता हूँ।
मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है। मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है।
मैं तुम्हारे वास्ते उस फौजी के टुकड़े चुन लाया हूँ। मैं तुम्हारे वास्ते उस फौजी के टुकड़े चुन लाया हूँ।
दाने दाने को मर रहा आपका परिवार है। ये कैसे कश लगाते हो? दाने दाने को मर रहा आपका परिवार है। ये कैसे कश लगाते हो?
राष्ट्रपति की बग्घी हमारे लिए बहुत उत्सुकता का कारण होती थी। राष्ट्रपति की बग्घी हमारे लिए बहुत उत्सुकता का कारण होती थी।
मनु जबकि मात्र 4 बरस की तभी माता का संग छूटा, जिम्मेदारी मनु की पिता तांबे के सर आयी, मनु जबकि मात्र 4 बरस की तभी माता का संग छूटा, जिम्मेदारी मनु की पिता तांबे क...
बस कुछ इस तरह, अपनी जिन्दगी से खुद के लिए खुशियों के कुछ पल चुरा लेती हूँ। बस कुछ इस तरह, अपनी जिन्दगी से खुद के लिए खुशियों के कुछ पल चुरा लेती हूँ।
छापली थी, मुगल छावनी, दिवेर से, जीत की शुरुआत हुई । घोड़े समेत , बहलोल खाँ को चीरा, वीर प्रताप की ... छापली थी, मुगल छावनी, दिवेर से, जीत की शुरुआत हुई । घोड़े समेत , बहलोल खाँ को च...
कौन कहता है कि गुलशन की जमीं उर्वर नहीं, कौन कहता है कि मेरा ये वतन कमजोर है। कौन कहता है कि गुलशन की जमीं उर्वर नहीं, कौन कहता है कि मेरा ये वतन कमजोर है।
कुछ हक़ तो उसका भी था जिसने हमदम हमसफर बन सात जन्मो के लिए साथ निभाने का वचन दिया, कुछ हक़ तो उसका भी था जिसने हमदम हमसफर बन सात जन्मो के लिए साथ निभाने का वचन दिया...
वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी
छोड़ दे कान्हा बस एक बार कैसे छोड़ दूँ तुझे मैं कंस मामा छोड़ दे कान्हा बस एक बार कैसे छोड़ दूँ तुझे मैं कंस मामा
प्रधान मंत्री जी, स्पष्ट उद्देश्य के साथ, साल दर साल भारत का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रधान मंत्री जी, स्पष्ट उद्देश्य के साथ, साल दर साल भारत का नेतृत्व कर रहे ह...
नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।। नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।।
रोज ही आशीष मिलता था चरण छूए बिना अब नमस्ते का न उत्तर आ गये परदेश में। रोज ही आशीष मिलता था चरण छूए बिना अब नमस्ते का न उत्तर आ गये परदेश में।
अब कृपा नहीं अधिकार चाहिये, मेरे वजूद पर ना उपकार चाहिये, अब कृपा नहीं अधिकार चाहिये, मेरे वजूद पर ना उपकार चाहिये,
आज कैसी सौगात तू दे गया अपनी प्यारी मुन्नी को तू आज कैसे अकेला छोड़ गया आज कैसी सौगात तू दे गया अपनी प्यारी मुन्नी को तू आज कैसे अकेला छोड़ गया
देख तिरंगा लहराता हमें नाज़ देश पर होता है सोचो आज़ादी पाने को एक वीर क्या खोता है देख तिरंगा लहराता हमें नाज़ देश पर होता है सोचो आज़ादी पाने को एक वीर क्या खो...