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Madan lal Rana

Inspirational

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Madan lal Rana

Inspirational

जीवन सुधा

जीवन सुधा

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एक टीस सी उठती है ,

दर्द  गहरा  होता  है।

मन पिंजरे की पंछी सा,

तड़प-तड़प कर रोता है।।


रास्ते धुंधले-धुंधले से हैं,

लक्ष्य भी लापता है।

उलझनें इतनी हैं कि,

होश फाख्ता है।।


कहां से चले थे,

और कहां तक जाना है।

चार दिन की जिन्दगी में,

कहां अपना ठिकाना है।।


जीवन, निरस, निरुद्देश्य,

खोयी-खोयी सी हैं दिशाएं।

कौन हौसले को संबल दे

भटके को कौन राह दिखाये।।


काश.!वो प्रकाश पुंज अपने भी पास होता,

अपने भी सर पे गुरु का हाथ होता।

तब ना कोई दुविधा ना मैं बेसहारा होता,

अपनी भी झोली गुरु कृपा से भरा होता।।



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