STORYMIRROR

Bhawana Raizada

Abstract Drama Inspirational

4  

Bhawana Raizada

Abstract Drama Inspirational

जीवन की नैया

जीवन की नैया

1 min
228

कुछ उलझने कुछ सवाल 

मन में कुछ बवाल भी है। 

किस तरह से शांत कर लूँ

अग्रिम पथ पतझड़ भी है। 


निराशा का अथाह सागर

करता मन मंथन भी है। 

तीक्ष्ण बुद्धि परबस हारी

और हर बात का मलाल भी है। 


चहुँ ओर जो निगाह दौडाऊं

अशान्ति, इच्छा, अविश्वास ही है। 

अब बस करो, मुझे संभालो

मेरा तो बस अब तू ही है। 


जो रखी तुम्हारे चरणों में

मेरी भक्ति अब तू ही है। 

मुझ पर कृपा करो प्रभु

इस जीवन की नैया तू ही है। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract