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रिपुदमन झा "पिनाकी"

Tragedy

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रिपुदमन झा "पिनाकी"

Tragedy

जीवन के बाद

जीवन के बाद

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मेरे ख़त्म होते ही

ख़त्म हो जाएगा मेरा नाम

मेरा अस्तित्व

मेरी पहचान

मेरे मिट्टी होते ही

मिट जाएगा सबकुछ

मेरे बाद

नहीं कोई मेरा नाम लेने वाला

मेरे नाम को पीढ़ियों तक ज़िंदा रखने वाला

कोई कुलदीपक है

न कोई सुकन्या है मेरी

कोई भी नहीं मेरी संतान

जिसका जनक कहलाऊं मैं

लाड़ लगाऊं, इतराऊं मैं

जीवन का असीम सुख पाऊं मैं

जीयूं जिसके लिए

जो हो उद्देश्य मेरे जीने का

लगे मेरा नाम

किसी नाम के आगे

कहलाए मेरा ही अंश

मेरा लहू मेरा वंश

करूं उसके लिए वो सब

जो करता है एक पिता

अपनी संतान के लिए

जाना जाए मेरा नाम

उसके नाम से

पहचाना जाऊं मैं

उसके मुकाम से

करे नाम रौशन संसार में

मेरा और मेरे कुल का

सदियों तक पीढ़ियों तक

निभाए परंपरा

रीति रिवाज कुल की।

कोई नहीं मेरा

जो अंतकाल में पानी दे मुंह में

मेरे मरने के बाद कांधा दे

मुखाग्नि दे 

तर्पण करे मेरे नाम से

पिण्डदान करे मेरा

मुक्ति दे मुझे

मेरी तड़पती, भटकती आत्मा को

शांति प्रदान करे।

शायद यही है भाग्य मेरा

कि जीयूं ज़िन्दगी गुमनाम

मरूं जो मैं तो गुमनाम

रहे मेरा नाम भी गुमनाम

रहे न नामोनिशान मेरा

मेरे जीवन के बाद।



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