जीवन का आधार
जीवन का आधार
और कोई नहीं देखेगा
हमें ही खुद है देखनी
लेखा-जोखा कर्मों का
कर्मों की यह लेखनी
यही करोगे यही भरोगे
इसमें कोई संदेह नहीं
भगवान भरोसे छोड़ कर देख
क्यों जाना है तुझे कहीं
दर-दर भटक रहा है क्यों
तेरे अंदर ही सब कुछ है
खुद का खुद में बना ओधा
दूसरों के लिए तुछ है
चिंता के भवर में पल-पल डूब जाता है
भले कर्म कर ले बंदे
बस यही काम आता है
यह दिल से निभाने होते हैं
नहीं भूलकर भी खोते हैं
इन पर ही होता है
जीवन का आधार
प्यार से रखो इनको
नहीं होता इनका कारोबार।
