नूपुर Noopur शांडिल्य Shandilya
Abstract Romance
झूम झूम झूमत मन झूमर सम
झुकि झुकि झुकि झिलमिलात
सुवर्ण प्रफुल्ल अमलतास
छल छल छल छलकत रस
झंकृत हृदय में जागे उल्लास
छन छन छन मन की आस
झूलत पीत गुच्छ अमलतास
झुकी झुकी झुकी झिलमिलाता।
अपनी हिन्दी स...
झूमत अमलतास
माँ प्रणाम
बेकार से चमत्...
जीना और जीतना
रंग देना हर क...
बेशुमार रंग
सुकून के दिन ...
मिठास
भरने पड़ते हैं...
वक्त और दौलत पाई दोनों में बस ये अंतर है। वक्त और दौलत पाई दोनों में बस ये अंतर है।
उस आंदोलन के गीत को खामोशी ने निगल लिया, और, वह पल भी राख का कण बन गया। उस आंदोलन के गीत को खामोशी ने निगल लिया, और, वह पल भी राख का कण बन गया।
हमें अवसर मिला, वो खुशी आज भी दिल के करीब है, हमें अवसर मिला, वो खुशी आज भी दिल के करीब है,
जिनकी अस्वस्थता के कारण ही डाँ. राजेन्द्र प्रसाद जी अध्यक्ष बने थे जिनकी अस्वस्थता के कारण ही डाँ. राजेन्द्र प्रसाद जी अध्यक्ष बने थे
रखी है निष्ठा जो रघुनाथ पर। आशीष रहा है सदा माथ पर। रखी है निष्ठा जो रघुनाथ पर। आशीष रहा है सदा माथ पर।
तुम धारा बनकर गंगा की संग मेरे बह पाओगी ना । तुम धारा बनकर गंगा की संग मेरे बह पाओगी ना ।
श्रेय को गर सिद्ध किया तब, अक्षय पुण्य कमाना है। श्रेय को गर सिद्ध किया तब, अक्षय पुण्य कमाना है।
हम भी चट्टान बन कर खड़े, हर एक लहर तब लगी चटखने हम भी चट्टान बन कर खड़े, हर एक लहर तब लगी चटखने
मिलेगा प्रेम तब हमको, जब हम लुटाएंगे प्यार। मिलेगा प्रेम तब हमको, जब हम लुटाएंगे प्यार।
ज्ञान का विस्तार करते हैं विचार या ज्ञान में विस्तृत होते हैं विचार ज्ञान का विस्तार करते हैं विचार या ज्ञान में विस्तृत होते हैं विचार
यूं लड़ने को शस्त्र अनेकों शस्त्र धैर्य सा कोई नहीं है। यूं लड़ने को शस्त्र अनेकों शस्त्र धैर्य सा कोई नहीं है।
छूटने दो कुछ , मगर टूटने मत देना जकड़ रख मगर पकड़ ढीली रख।। छूटने दो कुछ , मगर टूटने मत देना जकड़ रख मगर पकड़ ढीली रख।।
उलझन को सुलझाने का ये हुनर, इन धागों में छिपे जीवनी मुहर। उलझन को सुलझाने का ये हुनर, इन धागों में छिपे जीवनी मुहर।
हरियाली विहीन धरा का नव निर्माण कर रहे हैं हरियाली विहीन धरा का नव निर्माण कर रहे हैं
राम नाम रस पीने वाले, भवसिंधु से उतरें। राम नाम रस पीने वाले, भवसिंधु से उतरें।
नई साल अब आने को है और पुरानी बीत रही है। नई साल अब आने को है और पुरानी बीत रही है।
धरती की गोद गाते गीत दीवाने, कभी तप्त कदम , छांव दे मुहाने। धरती की गोद गाते गीत दीवाने, कभी तप्त कदम , छांव दे मुहाने।
सपनों को पंख देना सीखना होगा, ना गुनगुनाऊं बस हवाओं के भरोसे। सपनों को पंख देना सीखना होगा, ना गुनगुनाऊं बस हवाओं के भरोसे।
माॅंगना है तो मांगें केवल, प्रभु दीजिए अनन्य भक्ति। माॅंगना है तो मांगें केवल, प्रभु दीजिए अनन्य भक्ति।
क्या ये यादें हैं या तेरा नशा बेहिसाब? क्या ये यादें हैं या तेरा नशा बेहिसाब?