सतविन्द्र कुमार राणा 'बाल'
Drama
समझो ! कितना दाम कमाया व्यापारी ने
अवसरवादी नौटंकी व कलाकारी ने
आग देख कर घी के पीपे खोल दिये हैं
जिल्लत सह, जेबें भरने की तैयारी ने।
जग भारत का यश...
शब्द बाण
नफरत न बढ़ा
जेबें भरने की...
दोहे
मुक्तक
दोहा
मुझे याद है तुम्हारा हर पल को हसीं बनाना तुम्हारे चले जाने के बाद से ये घर भी मकान हो गया है मुझे याद है तुम्हारा हर पल को हसीं बनाना तुम्हारे चले जाने के बाद से ये घर भी मक...
एक हिंदुस्तानी...। एक हिंदुस्तानी...।
सपने ! सपने !
झूठे समाज के लोग...। झूठे समाज के लोग...।
शुक्रिया आपका ! शुक्रिया आपका !
कब तक रोना है मुझको ये कब तक मैं ही बोलूंगी। कब तक रोना है मुझको ये कब तक मैं ही बोलूंगी।
पापा बहुत याद आते हैं आप जब मुझे ज़िद करने की इच्छा होती है, पापा बहुत याद आते हैं आप जब मुझे ज़िद करने की इच्छा होती है,
एक मुस्कुराहट ! एक मुस्कुराहट !
ये राहें कुछ तो कहती हैं...। ये राहें कुछ तो कहती हैं...।
चिड़िया हमें क्या सिखाती है ? आइए जानें ! चिड़िया हमें क्या सिखाती है ? आइए जानें !
आवाज़...। आवाज़...।
तुमने तोड़ा है मैया का हृदय यशोदा सी माँ सृष्टि को ही विस्मृत कर बैठी थी अपने लल्ला अपने कान्हा के... तुमने तोड़ा है मैया का हृदय यशोदा सी माँ सृष्टि को ही विस्मृत कर बैठी थी अपने ...
तुम हो मौत के माथे पर ज़ुल्फ़ जैसी तुम हो बँटे हुए, मेरे मुल्क जैसी ऐ ज़िन्दगी मेरी तुम कैसी हो री? तुम हो मौत के माथे पर ज़ुल्फ़ जैसी तुम हो बँटे हुए, मेरे मुल्क जैसी ऐ ज़िन्दगी मेरी...
बहुत सपने देखें...। बहुत सपने देखें...।
हिन्द के निवासी...। हिन्द के निवासी...।
एक ग़ज़ल...। एक ग़ज़ल...।
तुम शाह-ए-अमीरा हो तुम्हें हक़ है गुमानी का मैं साथी हूँ फकीरों का मुझे आसान रहने दो तुम शाह-ए-अमीरा हो तुम्हें हक़ है गुमानी का मैं साथी हूँ फकीरों का मुझे आसान रहने...
जीवन के बारे में एक कविता। जीवन के बारे में एक कविता।
बचपन की थी सखी सहेली बहना थी मुँह बोली जब से गाँव शहर को आया बची न सुंदर बोली बचपन की थी सखी सहेली बहना थी मुँह बोली जब से गाँव शहर को आया बची न सुंदर बोली
चलो ! कहीं और चलते हैं...। चलो ! कहीं और चलते हैं...।