STORYMIRROR

Dev Faizabadi

Drama

3  

Dev Faizabadi

Drama

बेटियाँ है घर की इज्जत

बेटियाँ है घर की इज्जत

1 min
343

दुनिया ने भला ये कैसी अजब रीति बनाई है।

बेटियाँ है घर की इज्जत फिर क्यों पराई?


बेटी- ना तुझसे को शिकवा ना कोई गिला माँ,

माँगा था प्यार जितना उससे ज्यादा मिला माँ,

मै तेरी थी परछाई पीछा क्यो छुड़ाई है ?


माँ- मेरी हर खुशी मेरा संसार है तू,

मेरे चमन की सबसे अच्छी बहार है तू,

मुझको भी है निभानी जो हर माँ निभाई है।


बेटी - मिलता था बिन माँगे कितना दुलार पापा,

सर पे चढा रखा था इतना था प्यार पापा,

पापा की हूँ प्रिंसेज आज क्यूँ भुलाई है ?


पिता - क्या बीतती है मुझ पर तुझको नहीं पता,

क्या हाल मेरे दिल का ये कैसे दूँ बता,

दिल चाहता नहीं पर करनी विदाई है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama