STORYMIRROR

मधुशिल्पी Shilpi Saxena

Drama

3  

मधुशिल्पी Shilpi Saxena

Drama

चार कदम

चार कदम

1 min
313

सोचा था कोरे काग़ज़ पर 

कलम के साथ चार कदम चलूँगी।


न जाने कहाँ से ख्यालों के बादल छाने लगे

खट्टी मीठी यादों की हवाएँ बह चलीं।


इतने मे तेरी यादों की ऐसी बिजली कौंधी 

कि आँसुओं की बरसात होने लगी।


तेरे साथ बिताए एक एक पल में 

हम भीगे मन के साथ

सिर्फ तेरा नाम ही लिख सके।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama