Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Sudhir Kumar Pal

Romance

2  

Sudhir Kumar Pal

Romance

जब लगी हो आग़ जिस्म की

जब लगी हो आग़ जिस्म की

1 min
251


जब लगी हो आग जिस्म की

तो बीमारी-ए-दिल इश्क़ भी क्या करे।


जब दिल ही ना चाहे फ़ितरत में मचलना तेरी

तो मरमरी तेरा हुस्न भी क्या करे।


ये रंग-ओ-जमाल-ओ-रूह-ओ–मस्ती

अब कहाँ सोच-ए-मशक्क़त भी क्या करे।


फ़िराक-ए-हस्ती मेरी जब रहे तेरा हुस्न

तैश-ए-अदावत कोई तब भी क्या करे।


चिलमन-ओ-वफ़ा-ओ-सुकून-ए-हसरत 'नाज़'

बाज़-ए-ख़िलवत हो भला कोई तब भी क्या करे।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance